भगवान् श्री कृष्ण गीता के तीसरे अध्याय के १२,१३,१४ श्लोक में कहते हैं:-
         * यज्ञ द्वारा देवता तुमको बिना मांगे भोग निश्चित देते रहेंगे. जो देवताओं को दिए बिना भोगों को भोगता है वो चोर है.
* यज्ञ से बचे हुए अन्न को खाने वाले श्रेष्ठ पुरुष सब पापो से मुक्त हो जाते हैं. जो पापी लोग अपने शरीर के लिए पकाते हैं, वे पाप खाते हैं.
* सम्पूर्ण प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं. अन्न की उत्पत्ति वर्षा से होती है. वर्षा यज्ञ से होती है. श्रेष्ठ यज्ञ, विहीत कर्म (गोबर के कंडे, गोघृत) से होता है.

        निष्कर्ष: गोबर के कंडे और गोघृत की अग्नि को  खिलाकर प्रसाद पाएं. हैं.  सबको प्रेरित करें.
प्रार्थना
हे गोमाता! आपको प्रणाम है, आपके विभिन्न अंगो में निवास करने वाले सभी देवी देवताओं  को प्रणाम है. गोभक्तो एवं संतो की शक्ति हमें मार्ग दर्शन दे, गोबर में स्थित लक्ष्मी माता! आपको प्रणाम है, आप कृपया प्रगट हो कर विश्व का कल्याण करें. गोमूत्र में स्थित गंगा माता! आपको प्रणाम है, आप कृपया प्रगट होकर विश्व की रक्षा करें. गोदूध, दही गोघृत में हे अमृत! आपको प्रणाम है, आप कृपया प्रगट हो कर विश्व को स्वस्थ एवं पुष्ट करें. हे गोपाल ! हे गोविन्द  , विश्व में गोवंश की रक्षा हो. सभी गोभक्तो के चरणों में बारम्बार प्रणाम.
हे गोमाता! हमें प्रेरणा एवं शक्ति दे, ताकि गोरक्षा के कार्यो में हमारा तन मन धन लग सके. एवं प्राणी मात्र की रक्षा में हमें सफलता मिले.
गोरक्षा के सरल सहज उपाय  :
१. नवग्रह धुप एवं गोघृत दीपक चेतन करें और कराएँ. २. सदाचारी+ शाकाहारी को चुने और चुनाए ३. गोरक्षा गुल्लक में रोज रुपया डालें. ४. गोबर   के कंडे पर रोज हवन/अग्निहोत्र करें; अग्नि को खिला कर खाए. ५. पेड़ लगाये गोबर के खाद+ गोमूत्र कीट नियंत्रक धरती को दे. ६. गोबर की खाद से उत्पन्न अन्न- सब्जी-फल खाएं. ७. पंचगब्य पदार्थो का प्रयोग + प्रचार करें. ८. हर वर्ष एक गोवंश खरीद कर बचाए. ९. हर माह १ गाय/सांड/बछड़े के पालन का खर्च किसी गोशाला या ग्रामीण गोपालक को दे. १०. गोबर गैस प्लांट + गोमूत्र की बैटरी ऐसे ग्रामीण गोपालक को दे, जिस गाँव में बिजली न हो. ११. प्रतिदिन/प्रतिहफ्ता एक घंटा समय दें, गोचर्चा करें, चिंतन करें, योजना बनायें, अमल में लायें.
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