देश सेवा – गोरक्षा के लिए माँतृशक्ति का आह्वान १८-११-२०११
आज, देशी गाय का शुद्ध दूध, दही, घी, गोबर की खाद से उत्पन्न शुद्ध अन्न-फल-सब्जी, भारत में कितनो को मिलता है? फलस्वरूप हमारी भावी पीढ़ी में वह शाररिक व् आत्मिक शक्ति नहीं जो हमारे पूर्वजो में थी. देशी गोवंश तेज़ी से घट रहे हैं. सरकार की गलत नीतियों, मांस निर्यात, गैरकानूनी कुर्बानी, कत्लखानो एवं बंगलादेश तस्करी की भेट चढ़ रहे हैं. जैसे जैसे गोवंश घटता जा रहा है, वैसे-वैसे शुद्ध अन्न-घी-दूध की उपलब्धता कम होती जा रही है. स्थिति भयावह है. केवल मातृशक्ति ही मानव जाति को बचा सकती है.
प्रभु कृपा से गोवंश को बचाने, १ शहर-जिला-प्रांत- देश में १-१ माता-बहन सक्रिय हो जाए तो कमाल का परिवर्तन बहुत शीघ्र आ सकता है. वह माता-बहन अपने ५-१० परिचितों को जोड़कर एक सशक्त टीम बना सकती हैं. हफ्ते में एक बार मिलकर या फोन पर बातचित कर, एक दूसरे ने क्या किया- जान सकती हैं, एक दूसरे को प्रेरित कर सकती हैं, चिंतन कर सकती हैं कि पूर्ण गौरक्षा कैसे हो!
माताओं! बहनों! बेटियों! आप से केवल इतनी अपेक्षा है कि आप गीता को अपनाये = दोनों समय अग्नि रुपी भगवान को खिला कर परिवार को खिलाये. रोज कम से कम १ माता-बहन को इसके लिए प्रेरित करें. संभव हो तो अपने पास पर्याप्त कंडे, घी रखे. अन्यथा पता बताये जहाँ ये अनमोल वस्तुएं प्राप्त होगी. अगर आप पंचगव्य से बने ‘नवग्रह धूप’, पवित्रा साबुन, मंजन, अंगराग, राख, फिनाइल, आदि का भी प्रयोग+प्रचार कर सके तो सोने में सुगंध आ जाएगी.
इन दिव्य वस्तुओं का प्रयोग करने से, अग्नि रुपी भगवान् को खिलाकर खाने से, रोज गौरक्षार्थ थोड़ा सा प्रयत्न+ प्रार्थना करने से, एकाधिक फोन कर लोगो को गोरक्षा का पुण्य कमाने का मौका देने से- गोमाता का चित देने से आपका एवं आपके परिवार, शहर, जिले, प्रांत, देश का कितना मंगल होगा, इसकी कल्पना करना भी कठिन है.
सारे देवता हार गये तो मातृशक्ति ने संगठित होकर दुर्गा रूप में महिषासुर आदि असुरो का संहार किया था. आप ४-५-९ माताएं मिलकर सब कुछ कर सकती हैं. कृपया लौटती डाक से स्वीकृति दें कि आप कितना समय दे सकती हैं? किस स्तर पर काम करना चाहती हैं? आपको गोमाता के कितने चित्र चाहिए?
कृते राष्ट्रीय अहिंसा मंच – कामधेनु विश्व विद्यापीठ

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